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देश की आजादी और उसके बाद के समय में मीडिया ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खास तौर पर लोकतंत्र को मजबूत बनाने में, देश के मीडिया की अहम् भूमिका रही है। हालांकि बीते एक दशक में स्थितियां बदली हैं। एक ओर जिस तरह बेतरतीब मीडिया संस्थानों की संख्या बढ़ी है,स्थिति गम्भीर होती जा रही हैं। मीडिया संस्थानों की कार्य – शैली और भूमिका पर विचार करने की ज़रुरत है। एक ओर मीडिया संस्थानों की संख्या के साथ ही मुनाफा कमाने की होड़ बढ़ रही है,वहीं दूसरी और मीडिया संस्थानों पर सरकारी मशीनरी का जबर्दस्त हस्तक्षेप देखा जा रहा है

वर्तमान समय का विरोधाभास है कि मीडिया संस्थानों की संख्या बढ़ने के बावजूद,अभी भी देश का एक बड़ा हिस्सा मीडिया की पहुंच से दूर है।देश के मेट्रो शहरों के बाहर अगर कोई पत्रकारिता मौजूद है,तो वह महज़ स्थानीय अखबारों या पत्रिकाओं के बूते ही कमोबेश टिक पा रही है।मीडिया संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद,दूर-दराज के गांव,ढाणियां आज भी मुख्य धारा के मीडिया से कोसों दूर हैं।उनकी आधारभूत समस्याएं,या प्रशासन से जुड़े हालात,ख़बरों में अपनी जगह नहीं बना पाते।

हालांकि बीते चार पाँच सालों में सोशल मीडिया की मौजूदगी ने गांवों की घटनाओं के प्रचार-प्रसार में खासी भूमिका निभाई है।सोशल मीडिया की पहुंच निस्संदेह तेज़ी से बढ़ी है,लेकिन वहां उपलब्ध समाचार-सामग्री की वैधता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो जाता है।ऐसे में ज़रुरी है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध ख़बरों की वास्तवकिता को जांचते हुए, इस मीडिया का उपयोग ग्रामीण भारत की खब़रों के लिए किया जाए।
AAPNI KHABRA (आपणी ख़बरा) ने इसी सपने को आधार बनाते हुए, छोटी सी टीम के साथ काम करना शुरु किया है। खबर और विज्ञापन की दृष्टि से कम उपजाऊ राजस्थान की जनता की आवाज बनने के लिए पूरी टीम प्रतिबद्ध रहेगी। हमारी टीम से जुड़े हर साथी को खबर में समुचित नाम और सम्मान दिया जाएगा

हमारा यकीन है कि छोटे-छोटे गांवों-कस्बों और शहरों के संवाददाताओं से ही AAPNI KHABRA (आपणी ख़बरा) की पूरी टीम तैयार होती है।

हमारा उद्देश्य है कि हम गांव,ढाणी- कस्बे के आखिरी व्यक्ति तक अपनी पहुंच बना सकें।पिछड़े इलाके जहाँ अपनी बुनियादी समस्याओं और स्थितियों के साथ
हमारे ज़रिए अपनी बात रख सकें।