भाजपा-कांग्रेस के मध्य कड़ा चुनावी मुकाबला होने की संभावना,
निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं चुनावी समीकरण,
कांग्रेस से छह, भाजपा से तीन दावेदार टिकट की दौड़ मे शामिल

जमनालाल यादव (पत्रकार)

छबड़ा, आगामी होने जा रहे विधानसभा चुनाव में छबड़ा-छीपाबड़ौद क्षेत्र से भाजपा से वर्तमान विधायक प्रतापसिंह सिंघवी को भाजपा प्रत्याक्षी लगभग तय माना जा रहा हैं किंतु अभी-भी कांग्रेस में असमंजस्य की स्थिति बनी हुई हैं। हालांकि इस चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के मध्य ही कड़ा चुनावी मुकाबला होने ही संभावना हैं। वही पूर्व मुख्यमंत्री भी स्वर्गीय भैरूसिंह शेखावत भी यहां से भाजपा से दो बार विधायक बनकर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।
छबड़ा-छीपाबड़ौद विधानसभा क्षेत्र मे लगभग 2 लाख 25 हजार 326 मतदाता हैं जिनमें से छबड़ा तहसील क्षेत्र में 1 लाख 5 हजार 302 एवं छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र में 1 लाख 20 हजार 24 मतदाता हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव में प्रदेशभर की जनता का फोकस बारां जिले की छबड़ा-छीपाबड़ौद विधानसभा क्षेत्र पर रहता हैं क्योकि प्रत्येक बार विधानसभा चुनाव मे इस सीट पर कांटे की टक्कर का मुकाबला होता आ रहा हैं। गौरतलब हैं कि वर्ष 1977 में स्व. प्रेमसिंह सिंघवी भाजपा से विधायक बने थे जिसके बाद वर्ष 1980 में स्व. प्रेमसिंह सिंघवी ने स्वैच्छा से स्व. भैरूसिंह शेखावत के लिए सीट छोड़ दी थी। स्व. शेखावत ने इस क्षेत्र से कांग्रेस के रामप्रसाद मीणा को हराया हैं। जिसके बाद 1985 में प्रतापसिंह सिंघवी भाजपा से प्रत्याक्षी बने इन्होने कांग्रेस के प्रत्याक्षी पुरूषोत्तम सोनी को हराकर जीत दर्ज की थी जिसके बाद वर्ष 1990 में इस क्षेत्र से स्व. शेखावत विजयी हुए थे और वे प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने थे। जिसके बाद वर्ष 1993, 1998 व 2003 में भाजपा के प्रतापसिंह सिंघवी विधायक पद पर जीत दर्ज की थी। इन चुनावो में सिंघवी ने कांग्रेस के प्रत्याक्षी अबरार अहमद, दो बार मानसिंह धनोरिया व प्रकाश नागर को हराकर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वर्ष 2003 में विधायक सिंघवी को स्वायत्त शासन मंत्री, खेलकूद व वन मंत्री का जिम्मा भी सौंपा था। उन्होने अपने मंत्री कार्यकाल में उन्होने क्षेत्र की कायापलट करने मे कोई कसर तक नही छोड़ी थी। सिंघवी ने छबड़ा-छीपाबड़ौद के किसानो को अफीम के पट्टे दिलाने मे बारां-झालावाड़ संसदीय क्षेत्र के सांसद दुष्यंतसिंह के सहयोग से अहम भूमिका निभाई।

वर्ष 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से प्रतापसिंह सिंघवी, कांग्रेस से करणसिंह राठौड़ के बीच चुनावी कड़ा मुकाबला हुआ इस चुनावी जंग में कांग्रेस के करणसिंह राठौड़ ने भाजपा के सिंघवी को 6948 मतो से हराकर भाजपा के गढ़ मे सेंध लगाई थी। जिसके बाद 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में सिंघवी ने राजपा प्रत्याक्षी मानसिंह धनोरिया 61,385 मतो से हराकर राज्य मे दूसरी सबसे बड़ी जीत हासिल की थी। कांग्रेस प्रत्याक्षी प्रकाश नागर तो तीसरे नंबर पर रहे। वर्ष 2013 में प्रतापसिंह सिंघवी विधायक बनने के बाद उन्होने इस क्षेत्र में पुल-पुलियाऐं, गौरव-पथ आदि बनवाकर जनता को राहत प्रदान की हैं और बिजली-पानी जैसे मुख्य बिंदुओ पर ध्यान दिया हैं व शिक्षा को भी बढ़ावा दिया हैं।

तथा गत दिनो राजस्थान-मध्यप्रदेश को जोड़ने वाले गुगोर-पार्वती पुल पर बनने वाले हाई लेवल ब्रिज के हुए शिलान्यास समारोह मे भाग लेने पहुंचे प्रदेश की मुख्यमंत्री के पुत्र एवं बारां-झालावाड़ सांसद दुष्यंतसिंह द्वारा अपने भाषण मे इस विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक प्रतापसिंह सिंघवी को भाजपा प्रत्याक्षी लगभग तय होने की बात कही थी तब से प्रतापसिंह सिंघवी ने चुनावी समर मे ताकत झौंकना प्रारंभ कर दिया था। विधानसभा चुनाव से पूर्व इस पुल के आयोजित हुए शिलान्यास समारोह से भाजपा को फायदा होने की संभावना बताई जा रही हैं। भाजपा-कांग्रेस के विधायक पद के दावेदार इन दिनो मतदाताओ की मान-मनुहार करने मे जुटे हुए हैं। आगामी होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा से सिंघवी के अलावा पूर्व विधायक स्व. नंदकिशोर शर्मा के पौत्र निरंजन शर्मा, मुकेश नागर अल्लापुरा भी टिकट की दौड़ चल रहे हैं।

वही इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रबल दावेदार माने जा रहे पूर्व विधायक करणसिंह राठौड़ ने गत माह पूर्व छबड़ा-छीपाबड़ौद विधानसभा के प्रत्येक गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी मे ’मेरा बूथ-मेरा गौरव’ कार्यक्रम आयोजित किए गए थे जिनमें ग्रामीण जनता उमड़ती नजर आ रही थी जिसका फायदा कांग्रेस को मिलने की संभावना हैं। पूर्व विधायक राठौड़ के कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंह से पारिवारिक संबंध बताए जा रहे हैं तथा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी करीबी माने जा रहे हैं। इस कारण राठौड़ भी कांग्रेस प्रत्याक्षी स्वयं को लगभग तय मानते हुए उन्होने भी चुनावी तैयारियां शुरू करते हुए अभी से ही जनसंपर्क मे जुट गए हैं। राठौड़ के अलावा इस क्षेत्र से पूर्व पालिकाध्यक्ष नाथूलाल अग्रवाल भी कांग्रेस से प्रत्याक्षी बनाने के लिए भाग्य आजमा रहे हैं।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद जैन भाया को इन्हे ज्यादा करीबी माना जा रहा हैं। अग्रवाल कांग्रेस के आयोजित होने हुए बड़े से बड़े एवं छोटे-छोटे से कार्यक्रमों, धरना-प्रदर्शनो, आम-सभाओ में अपने समर्थको के साथ शिरकत कर कांग्रेस के दिग्गज नेताओ से अपनी पहचान बना ली हैं। इनके अलावा कांग्रेस के सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्रसिंह चूड़ावत, पूर्व प्रधान मानसिंह धनोरिया, दिग्विजयसिंह गुर्जर, महेंद्रसिंह चौधरी भी टिकट की मांग को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ की मान-मनुहार मे लगे हुए हैं। अब देखना यह हैं कि इस क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याक्षी कौन बनेगा, जनता की निगाह इस पर टिकी हुई हैं।