छबडा, सत्य का असत्य पर जीत का प्रतीक विजयादशमी पर्व पर अभिमानी रावण का अंहकार हुआ खत्म। रेणुका नदी के पचपन फुट ऊंचे रावण के पुतले के दहन से रंगीन आतिशबाजी से शहर से गूंज उठा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विजयादशमी पर्व पर गायत्री मंदिर पर गाजे-बाजे के साथ रथ मे सवार होकर राम-लक्ष्मण एवं शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण, सरस्वती इत्याादि आधा दर्जन झांकियां सजाकर गायत्री मंदिर पर एकत्रित होगी। जहां से गाजे-बाजे के साथ मुख्य मार्गाे से होता हुआ जुलुस धरनावदा चैराहा, आजाद सर्किल, लोटा भैरू, अलीगंज बाजार, छत्री चोराहा होता हुआ नदी दरवाजे के निकलकर रेणुका नदी के तट पर पहुंचा। नदी के तट पर पहुंचकर भगवान श्रीराम एवं अहंकारी रावण के मध्य संवाद हुआ। इसके तत्पश्चात् श्रीराम के द्वारा धनुष सेे चलाए गए एक बाण ने अहंकारी रावण का अहंकार चूर-चूर कर दिया। इस पचपन फुट ऊंचाई के रावण दहन से रंगीन आतिशबाजी की आवाज से पूरा शहर गूंज उठा। रावण दहन से पूर्व रावण ने आंखे टिमटिमाई, तलवार भी घुमाई, आग के गोले छोड़े एवं चकरी चलाई। रावण दहन स्थल पर कानून व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन तैनात रहा। रावण पुतले के दहन को देखने के लिए शहरवासियों का हुजुम उमड़ पड़ा। वहीं रेणुका नदी पर बनी पुलिया बनने से जनता को राहत हुई।