रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) राजस्थान पंचायती राज सेवा परिषद के प्रदेश व्यापी आह्वान पर पिछले 12 सितंबर से चल रहे सामूहिक अवकाश एवं धरना आंदोलन से जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में कामकाज ठप्प होने से सन्नाटा पसरा हुआ है। राजस्थान ग्रामीण विकास सेवा परिषद के प्रदेशाध्यक्ष बबलीराम जाट, राजस्थान पंचायत प्रसार अधिकारी मंच के प्रदेशाध्यक्ष सोहनलाल डारा एवं राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि प्रदेश की 295 पंचायत समितियों में प्रधानों द्वारा ताले लगाकर पंचायतीराज सेवा परिषद के घटक संवर्गो द्वारा 14 दिन से जारी क्रमिक असहयोग आंदोलन को समर्थन दिया गया। तालाबंदी के बाद कार्यवाहक विकास अधिकारी एवं प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ विकास अधिकारियों ने संगठन को लिखित में समर्थन देने का संकल्प पत्र जिला प्रभारियों को सौंपकर परिषद के आव्हान पर धरनास्थल पर आकर बैठे। उधर, आरएएस एसोसिएशन की मांगों के विरोध में 17 विभागों के लगभग 3 हजार से अधिक राजपत्रित अधिकारियों के संगठन राजस्थान राज्य अन्य प्रशासनिक सेवा परिसंघ ने आरडीएस अधिकारियों की मांग को जायज बताते हुए मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपकर कहा कि यदि इनकी मांगों को मानकर उचित आदेश जारी नहीं किये गए तो राजस्थान राज्य अन्य प्रशासनिक सेवा परिसंघ के समस्त अधिकारी अनिश्चितकालीन अवकाश पर चले जाएंगे।

ज्ञात रहे कि 14 दिनों से अनवरत इस आंदोलन के दौरान प्रदेश के भाजपा-कांग्रेस के 182 विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया। परिषद के पदाधिकारियों में 14 दिन में भी कोई कार्यवाही नहीं होने तथा नौ बार मंत्री के लिखित समझौतों की उच्चाधिकारियों द्वारा आरएएस लॉबी के दबाव में कोई कार्यवाही न होने देने के कारण भारी रोष व असंतोष व्याप्त है, जिसके चलते संगठन ने दिन-प्रतिदिन आंदोलन को तेज करने का 12 हजार अधिकारी-कर्मचारियों से आव्हान किया है।
उधर ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था में विकास के अवकाश पर चले जाने से महात्मा गांधी नरेगा में श्रमिक नियोजन आधे से भी कम रह गया है, लाखों श्रमिकों को करोड़ों रूपए का भुगतान अटक गया है, यही स्थिति प्रदेश को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, पेंशन, श्रमिक कल्याण मंडल योजनाओं, वित्त आयोग, भामाशाह कार्ड, राशन कार्ड, पट्टा वितरण, फ्लैगशिप योजना, मुख्यमंत्री जल स्वालंबन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, अनुजा योजना, सांसद-विधायक कोष कार्यो सहित कई कार्यो के अरबों रूपयों का भुगतान रूक गया है। संगठन के आव्हान पर आगामी 26 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर वाहन रैली निकालकर मांगों के प्रति सरकार का ध्यानाकर्षण एवं विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही 2 अक्टूबर को पंचायतीराज स्थापना दिवस पर जयपुर में विशाल आक्रोश रैली में अधिकारी-कर्मचारियों के परिजन सहित 60 हजार से अधिक लोग भाग लेंगे। तथा 3 अक्टूबर को पंचायतीराज सेवा परिषद की कोर कमेटी के सदस्यों द्वारा जयपुर में आमरण अनशन किया जाएगा।
रावतभाटा, बेगूं उपखंड़ क्षेत्र सहित प्रदेश के कई ग्राम पंचायतों में अटल सेवा केंद्र बंद होने से ग्रामीणों को वापस लौटना पड़ रहा है, जिला मुख्यालय सहित जिले की सभी ग्राम पंचायत पर आम आदमी का कामकाज प्रभावित हो रहा है। पंचायत राज के मंत्रालयिक संवर्ग एवं नरेगा कर्मी भी आंदोलन का ज्ञापन देकर आन्दोलन पर हैं। विकास के रीढ समझे जाने वाले पंचायत राज सेवा परिषद के आंदोलन से जिले और तहसील स्तर पर सभी कार्य एवं योजनाओ की क्रियान्विती नहीं हो पा रही है। 26 सितंबर को सेवा परिषद के सभी अधिकारी जिला मुख्यालय पर धरना एवं विशाल वाहन रैली में शामिल होने जाएंगे। धरना स्थल पर बेगूं विकास अधिकारी डॉ. भानुमौली मौर्य, पंचायत प्रसार अधिकारी सत्येंद्र सिसोदिया, लोकेश जैन, ग्राम विकास अधिकारी चंद्र सिंह भाटी, महेश शर्मा, नारायणलाल लाल, धर्म सिंह पंवार, भीमराज, ओमप्रकाश सोनी, मुकेश मारू, गणपतलाल शर्मा, सुरेश शर्मा, हरि सिंह हाड़ा, जानकी पंचोली, हंसराज, श्रीनाथ गुप्ता, डुंगरलाल, भरत निहलानी सहित पंचायत राज सेवा के अधिकारी धरने पर बैठे।