रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) रावतभाटा नगर में स्थापित गोबर, काली मिट्टी व मुल्तानी मिट्टी से निर्मित गणेश की प्रतिमा नगर के बुद्धा गार्डन की पहचान बन गई है। चंबल नदी को प्रदूषण से बचाने व उनके संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से गणेशोत्सव के दौरान गोबर गणेश की प्रतिमा की स्थापना की परंपरा बन गई है। इसके साथ ही ये प्रकृति की सगुण उपासना और मंगलमूर्ति के प्रति आस्था प्रकट करने का सशक्त माध्यम बन गया है। नगर पालिका अध्यक्ष बंशीलाल प्रजापत ने बताया कि बुद्धा गार्डन में स्थापित गोबर गणेश की प्रतिमा का पानी का छोटा सा कृत्रिम जलाशय बनाकर उसमें मूर्ति का विसर्जन कर प्रत्येक परिवार कृत्रिम जलाशय में विसर्जित हो चुकी प्रतिमा की मिट्टी का पानी अपने घर ले जाकर तुलसी के पौधे में डाला जाता है। नगर के बुद्धा गार्डन में शुभ-मुहूर्त में गोबर, काली मिट्टी व मुल्तानी मिट्टी से निर्मित गणेश की प्रतिमा की धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ स्थापना की गई। जंहा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान परमाणु बिजलीघर के मानव संसाधन विभाग प्रमुख के.जी. चंद्रशेखरन सपरिवार मौजुद थे। नगर के रिद्धी-सिद्धी विनायक मंडल द्वारा गुरूवार को रामलीला मंच पर 10 फीट की गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की गई। रिद्धी-सिद्धी विनायक मंडल द्वारा छठां गणेश महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जिसके अन्तर्गत शुक्रवार को रात्रि 9 बजे सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही रावतभाटा उपखण्ड क्षेत्र के नगर एंव ग्रामीण अंचल में गुरूवार को गणेश चतुर्थी पर्व धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। रावतभाटा उपखंड क्षेत्र के ग्रामीण अंचल के कई गांवों सहित नगर के चेतक मार्केट स्थित श्री सार्वजनिक गणेश मंदिर पर श्री गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना, पुराना बाजार स्थित श्री अनोखेराज हनुमान मंदिर, कोटा बेरियर स्थित श्री गुरू गणपति ज्ञान मंदिर, श्री नारायण पुरी आश्रम गणेश मंदिर, हैवीवाटर स्थित, ई.एस.एल, बुद्धा गार्डन पर, एन.टी.सी. मुक्तेश्वर महादेव जी शिव मंदिर, चारभुजा झालरबावडी स्थित मंदिर, विक्रम नगर टाउनशिप, अणुशक्ति स्थित फेज वन श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, चारण बस्ती स्थित मंदिर, भैंसरोडगढ स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, पाडाझर माताजी स्थित मंदिर, मानव मंदिर स्थित मंदिर एंव बाडौलिया मंदिर सहित कई मंदिरों एंव स्थानों पर श्री गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना गाजे बाजे के साथ जूलुस निकाल कर शुभ मुर्हूत में पूजा अर्चना एंव अनुष्ठान के साथ की स्थापना की गई। गुरूवार को विभिन्न गली, मोहल्ले, स्थानों पर शुभ मुर्हूत में श्री गणपति जी की स्थापना गुरूवार को पूजा अर्चना व अनुष्ठान के साथ की गई। कई स्थानों पर इसकी तैयारियों गत दिनों से ही शुरू हो गई थी।

गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मंगलमूर्ति विघ्नहर्ता भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में देश ही नहीं अपितु विश्व भर के हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू दर्शन के अनुसार गणपति आदि देव है, जिन्हे प्रथम पूज्य की गरिमामय पदवी हासिल है। शुभत्व के प्रतीक विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन यूं तो हर परिस्थिति में शुभ फलदायक होता है। किन्तु भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विधिविधान व शुभ मुहूर्त से किया गया। विघ्नहर्ता भगवान गणेश का व्रत पूजन कई गुना अधिक शुभ फल देता है। इसी के साथ दस दिवसीय गणपति महोत्सव की शुरूआत हो गई है। गुरूवार को श्री गणेश चतुर्थी पर्व पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर इन मंदिरों को विशेष तौर पर विद्युत सज्जा से सजाया गया। गणेशोत्सव शुरू होने के साथ ही समूचे क्षेत्र में गली-मोहल्लें में गरबा, डांडिया नृत्यों की धूम शुरू हो गई है। सांय ढलते ही रंग बिरंगी रोशनी से लकरक पांडालों में गणपति प्रतिमा के समक्ष उत्साही श्रद्वालुओं गरबा-डाडियां नृत्य करने जंहा आतुर नजर आए। वहीं दर्शनों के लिए लोगों की आवाजाही देर रात तक बनी रही। नगर व ग्रामीण अंचल के गली-मोहल्लों में स्थापित रिद्धि-सिद्धि गणेश प्रतिमाओं की रोजना झांकियां सजाई गई। कई जगहांे पर डांडिया-गरबा व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। गणेश महोत्सव के दौरान क्षेत्र की प्रतिमाओं पर रोज सुबह शाम आरती व महाआरती का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। तथा गुरूवार को शुभ-मुहर्त में गणेश पूजा-अर्चना, हवन, यज्ञ, अनुष्ठान-अभिषेक, भजन-कीर्तन, आरती संाय महाआरती तथा प्रसाद वितरण किया गया। सांय महाप्रसाद व गणेश मंदिर और प्रतिमा को पंचामृत स्नान के बाद गणेश जी के भव्य श्रृंगार के बाद कई मंदिरों में चोला चढाया गया। सिंदूर के लेप के साथ ही सोने व चांदी के वर्क लगाए गए। प्रतिमा की अपूर्व साज सज्जा करते हुए केसरिया परिधान, छत्र सोना एंव चांदी का मुकुट पहनाया गया तथा उसके बाद भव्य श्रृंगार के दर्शन हुए तथा पुरानी गणेश जी की प्रतिमा का अभिषेक और नई प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई और लड्डू का भोग लगाया गया। और सांय महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
गणेश मन्दिरों में दस दिवसीय विविध धार्मिक आयोजनों में श्रृंगार, विशेष आरती, रामायण पाठ एंव विशेष पूजा-अर्चना के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। भजन कीर्तन का आयोजन भी किया गया। साथ ही कई मंदिरों पर अंखण्ड जोत जलाई गई जो अनंत चतुदर्शी तक जलती रहेगी। इस अवसर पर बडी संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड रही। वहीं अनंत चतुदर्शी को विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। अनंत चतुदर्शी के लिए प्रशासन तैयारी में जुटा हुआ है।