आत्महत्या के पूर्व लक्षणों की समय पर पहचान एवं ऐसे व्यक्तियों और मनोरोगियों के साथ बेहतर सम्पर्क, संवाद और देखभाल से आत्महत्याओं की रोकथाम की जा सकती है

कोटा – विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितम्बर 2018 के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था ” मन आरोग्य न्यास ” के तत्वाधान में आज नयापुरा स्थित कार्यालय में आत्महत्या रोकथाम जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया ! संस्था के सचिव और मनोरोग विशेषज्ञ डा . वीरेंद्र मेवाड़ा ने बताया कि आत्महत्या करने वालों का आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है जो अति चिंताजनक और चुनौती पूर्ण है ! भारत में युवाओं की आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा बढ़ रहे हैं ! युवाओं पर परीक्षा का तनाव, बेरोजगारी, आधुनिक जीवन शैली एवं कैरियर का दबाव बहुत अधिक है, असफलता के भंवर से खुद को निकाल पाने में नाकाम जो युवा अत्यधिक गहरे तनाव को नहीं झेल पाते हैं वे समस्या का सामना करने की बजाय आत्महत्या का रास्ता चुन लेते हैं ! डॉ मेवाडा समस्या के रोकथाम के बारे में बताते हुए कहा कि अधिकांश आत्महत्या करने वाले अपने इरादों की पूर्व चेतावनी अथवा लक्षण प्रकट कर देते हैं जैसे चुपचाप, अकेले और अलग थलग रहने लगना, सबसे मिलना जुलना छोड़ देना, आत्मविश्वास में कमी, खुद को नुकसान पहुंचाने वाले काम करना , बहुत जल्दी चिड़चिड़ापन और किसी भी बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना, परिवार पर बोझ हूँ , मैं पैदा ही न हुआ होता और आत्महत्या की बातें करना आदि ! उन्हें आत्महत्या से रोकने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि मित्र, परिजन और सम्पर्क में रहने वाले लोग इन चेतावनियों को समय रहते पहचान लें ! ऐसे व्यक्तियों और मनोरोगियों के साथ बेहतर सम्पर्क, संवाद और देखभाल से आत्महत्याओं की रोकथाम की जा सकती है !
राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के पूर्व परामर्शदाता और मन आरोग्य न्यास के समन्वयक विजय राघव ने अपने सम्बोधन में कहा कि युवा एवं किशोर अपना अधिकतर समय स्कूल एवं कॉलेज में बिताते हैं अतः युवाओं में बढ़ते हुए आत्महत्या के प्रकरणों को देखते हुए देश के सभी स्कूल एवं कॉलेजों में आत्महत्या रोकथाम कार्यक्रम ( सुसाइड प्रिवेंशन प्रोग्राम ) लागु किया जाना चाहिए ! स्कूलों में बच्चों के तनाव को सँभालने का वातावरण होना चाहिए ! शिक्षकों एवं विधार्थियों के बीच सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए ! प्रत्येक स्कूल में कॉउंसलर औऱ साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति होनी चाहिए जो बच्चों के मन में उठ रहे आवश्यक विचारों की पहचान कर सकें एवं उनका निदान कर सकें ! इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्त्ता शम्भूदयाल सुमन, अभिषेक मित्तल और ललित मेवाडा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मनोचिकित्सक परामर्श एवं दवाओं से समाधान कर सकते हैं तो समाज में ऐसी संस्थाओं की भी जरूरत है जो जीवन में निराश लोगों की समस्याओं का सहानुभूतिपूर्वक विश्लेषण करके उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का कुछ प्रबंध कर सके।

विजय राघव
समन्वयक
मन आरोग्य न्यास कोटा
9462731463