रामगंजमंडी/अजयराज सिंह चौहान

मानसून की बारिश से राष्ट्रीय मुकुन्दरा अभयारण्य हरियाली की चादर से महक उठा है वर्तमान में रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में दर्रा अभयारण्य अपने आप मे एक सुंदर अनुपम सुंदरता लेकर बैठा है यहाँ मध्य से गुजर रही दिल्ली मुम्बई रेल मार्ग ,राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर राहगीरों के लिए पर्यटन स्थल से कम नही है वही मध्य मुकुन्दरा महल , छतरियां , तालाब दार्शनिक स्थल पर्यटकों को बड़े लुभाते है बारिश में मुकुन्दरा जन्नत से कम वही अपनी एक अलग पहचान मुकुन्दरा भारत देश मे रखता है घना जंगल, पहाड़, झरने, पोखर, तालाब और सदानीरा चम्बल और प्रकृति की गोद में पलते सैकड़ों प्रजाति के वन्यजीव। ऐसे में बाघों की बसावट के लिए मुकुन्दरा सुरक्षित, मुफीद और आदर्श जगह है। टाईगर रिजर्व मुकुन्दरा में वन्यजीव, वनस्पति, पुरा सम्पदा पर्यटकों को आकर्षित करती है।

मुकुन्दरा का विस्तार राजस्थान के 4 जिलों कोटा ,बूंदी ,झालावाड़ ,चित्तौड़गढ़ में फैला हुआ है |

राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर स्थित|
राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र-294.41 km²
बाघ परियोजना क्षेत्र – 759.99 km²
(कोर एरिया- 417 km²
बफर जोन कवरेज एरिया -342.82 km²)

अभयारण्य क्षेत्र का नाम मुकुंदरा की पहाड़ियां जिनका नाम कोटा के प्रसिद्ध प्रकृति प्रेमी हाडा शासक मुकुंद सिंह के नाम रखा गया ।मुकुंदरा हिल्स में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थल
अबली मीणी का महल (राजस्थान का दूसरा ताजमहल) कोटा नरेश राव मुकुंद सिंह द्वारा स्थापित|यहां गुप्तकालीन मंदिर के खंडहर (भीम चोरी )स्थित है|
चित्तौड़गढ़ में हूणों द्वारा बनवाया गया बाडोली का प्रसिद्ध शिव मंदिर है| राजस्थान का पहला मंदिर जिस पर निर्माण की तिथि अंकित है|

गागरोन किला (झालावाड़)
रावठा महल (कोटा)

मुकुंदरा पहाड़ियों में आदिमानव के शैलाश्रय वह उनके द्वारा चित्रांकित शैलचित्र मिलते हैं|मुकुंदरा अभयारण्य में पाई जाने वाली नदियां– चंबल, काली सिंध, आहू ,आमझर|

अभयारण्य क्षेत्र में रामसागर व झामरा नामक स्थानों पर जंगली जानवरों के अवलोकन के लिए अवलोकन स्तंभ बनाए गए हैं जिन्हें ओदिया कहा जाता है|

अभयारण्य के प्रमुख आकर्षण

गागरोनी तोता जूलॉजिकल नेम अलेक्जेंड्रिया पैराकीटमुकुंदरा हिल्स में पाया जाने वाला विशेष प्रजाति का तोता जो कि इंसान की आवाज की हूबहू नकल कर सकता है|इसकी कंठी लाल रंग की व पंख पर लाल रंग का धब्बा होता है|इसे हीरामन तोता तथा हिंदुओं का आकाश लोचन (मनुष्य की आवाज में बोलने वाला) भी कहा जाता है|
प्राचीन काल में इस तोते का उपयोग जासूसी करने हेतु किया जाता था|इसे वन विभाग ने झालावाड़ जिले का शुभंकर घोषित किया है|

सर्वाधिक घड़ियाल और सारस पाए जाते हैं|सांभर ,चीतल, नीलगाय, हरिन, जंगली सूअर, लोमड़ी, खरगोश आदि जानवर इस अभयारण्य में पाए जाते हैं|यह अभयारण्य धोकड़ा ( एनोजिस पन्डूला )वनों के लिए प्रसिद्ध है|