छबड़ा सुपर थर्मल पॉवर प्लांट की सीएसआर कोष के 32 करोड़ की राशि का थर्मल प्रभावित गांवां में विकास कार्य करवाने के बजाय अन्यत्र स्थानो पर व्यय करने का आरोप लगाते हुए पूर्व विधायक करणसिंह राठौड़ ने इसकी शिकायत संभागीय आयुक्त को करते हुए जांच करवाने की मांग की हैं।

पूर्व विधायक करणसिंह राठौड़ ने बताया कि सोमवार को उन्होने संभागीय आयुक्त कोटा से भेंट कर छबडा सुपर पॉवर प्लांट मोतीपुरा द्वारा 32 करोड़ की लागत का सी.एस.आर का फण्ड थर्मल प्रभावति एक दर्जन गांवो के विकास कार्यो में व्यय करने की योजना कांग्रेस सरकार की बनाई थी इसके तहत थर्मल प्रभावित तीतरखेडी, मोतीपुरा चौकी, अरन्यापार, भटखेड़ी, मवासा, राहरोन, सेवनखेड़ी, हनुवतखेडा, ढ़ीमरपुरा, बापचा, गोड़ियामेहर, आकोदियापार, आदि गांवो में सड़क, पानी, बिजली, पानी की टंकी, चिकित्सा, स्कूल, खेल मैदान सामुदायिक भवन व अन्य सुविधाओं के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई थी। उनके लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमानुसार 32 करोड़ की योजना कांग्रेस सरकार मे बनाई गई थी परंतु प्रदेश मे सरकार बदलने के बाद सी.एस.आर के 32 करोड़ के फंड का सत्तारूढ़ पार्टी के भाजपा नेताओ द्वारा दुरूपयोग कर अन्यत्र स्थान खर्च कर दिये गए हैं। जानकारी मिली हैं कि इस राशि को छबड़ा क्षेत्र व जिले से बाहर के क्षेत्र में इस फंड की राशि व्यय कर प्लांट प्रभावित गांवो के विकास को भाजपा सरकार ने नजर अंदाज करते विकास कार्य ठप्प करवा दिए हैं। तथा प्लांट मे जिन किसानों की जमीने अवाप्त की हैं ऐसे प्रभावित किसानों के साथ धोखा किया हैं। राठौड़ ने बताया कि उन्होने संभागीय आयुक्त मांग की हैं कि प्लांट प्रभावित गांवो के किसानों की बैठक बुलाई जाए ताकि इस सरकार में जनप्रतिनिधियों द्वारा व्यय की गई राशि का जनता को पता लग सके। साथ ही व्यय की गई उक्त राशि की जांच की भी मांग की हैं।