अस्पताल में ऑपरेषन के बाद भर्ती रति शर्मा व घर पर गौरी (बेबी ऑफ मीना)

कोटा- गरीब परिवारों में जन्मी दो और बेटियों की 8 अगस्त को अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में निषुल्क हार्ट सर्जरी करवाकर जान बचाई गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की बदौलत यह संभव हो पाया है। कार्यक्रम के तहत सांगोद के हरिपुरा गांव निवासी सत्यनारयण की 9 माह की बेटी गौरी को जन्मजात दिल में छेद की गंभीर बीमारी थी। उसे क्षेत्र की मोबाइल हैल्थ टीम ने गांव के ही आंगनबाड़ी केंद्र पर स्क्रीनिंग कर जिला स्तर पर रैफर किया था। इसी तरह शहर के बोरखेड़ा में रहने वाले अंकुर शर्मा की 5 साल की बेटी रति शर्मा को भी यही बीमारी थी। उसे भी नमृता आवास कॉलोनी के आंगनबाड़ी केंद्र से चिन्हित किया गया था। कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ एमके त्रिपाठी ने बताया कि जिला स्तर पर रैफर होकर आई इन बच्चियों की न्यू मेडिकल कॉलेज में आवष्यक जांचे करवाने पर दिल में छेद की बीमारी पकड़ में आई थी। इसके बाद विभागीय स्तर से प्रयास शुरू करते हुए रति शर्मा की सर्जरी शहर के कोटा हार्ट होस्पिटल में, वहीं दूसरी बच्ची की सर्जरी जयपुर के नारायणा ह्रदयालय होस्पिटल मेें करवाई गई। उन्होने बताया कि सफल ऑपरेषन के बाद गौरी अब घर लौट चुकि है जबकि रति अभी अस्पताल में ही भर्ती हैं और स्वस्थ हैं। डॉ त्रिपाठी ने बताया कि इन्हे मिलाकर जिले में अब तक 75 बच्चों की इस कार्यक्रम के तहत निषुल्क हार्ट सर्जरी करवाई जा चुकि है। इन सहित अन्य बीमारियों से ग्रसित कुल 192 की सर्जरी की गई है। इस मामले में कोटा जिला अभी तक प्रदेष में पहले पायदान पर मौजूद है। बच्चियों के माता-पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे उनका इलाज करवाने में सक्षम नही थे। ऐसे में आरबीएसके में निषुल्क उपचार हो जाने से इन परिवारांे पर से मुसिबतों का बोझ टल गया है।