नाम – सारिका मित्तल

पता – कोटा,राजस्थान

कार्य – समाज सेविका – अध्यक्ष ,भारत विकास परिषद रानी लक्ष्मीबाई शाखा

“तोड़ के हर पिंजरा ,जाने कब उड़ जाऊँगी चाहे लाख बिछा लो बंदिशे, फिर भी दूर आसमान में अपनी जगह बनाउंगी ”

ऐसी पंक्तियां भारत में उन महिलाओं के लिए सच सिद्द हुई है जिन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता के कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं जो हर किसी के लिए मिसाल हैं। वैसे तो भारत में अनगिनत महिलाएं हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। लेकिन एक चेहरा ऐसा भी है जिन्होंने बचपन से संघर्ष से जीवन में आगे बढ़ने के साथ ही खेल जगत व सामाजिक क्षेत्र में मानवता के अनूठे रूप को समाज के समक्ष पेश किया है , अपने कर्मो व वैचारिक जीवन से महिलाओं के लिए आदर्श है भारत विकास परिषद रानीलक्ष्मी शाखा की अध्यक्ष सारिका मित्तल ।
कोटा शहर के एक व्यवसायी मध्यवर्गीय परिवार में जन्मीं सारिका ने मिडिल क्लास तक कि शिक्षा एक छोटे से निजी स्कूल से पूरी करने के बाद सरकारी स्कूल में पढ़कर ही अपने भविष्य को सँवारा । उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद हिंदी साहित्य में एम.ए. कर NIFD चंडीगढ़ से 2 वर्ष तक फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया ।

सँघर्ष का सफर –
” कोमल है तू कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है ”

इन पंक्तियों को सार्थक जीवन में उतारा है सारिका मित्तल ने । सारिका ने ऐसे वक्त जो जिया है जिस वक्त सिर्फ लड़कों को ही शिक्षा में महत्व दिया जाता था । उस समय भी सारिका ने सरकारी स्कूल में भी अपनी प्रतिभा को चमकाए रखा । लेकिन बढ़ते वक्त के साथ वक्त बदलता गया और एक समय ऐसा भी आया जब सारिका को अपनी पढ़ाई तक के पैसे जुटाने में पारिवारिक आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा । वक्त ऐसा आ गया था कि सारिका के लिए पढ़ाई के साथ साथ नौकरी करना जरूरी हो गया था । ऐसे दौर में भी इन्होंने हौसलों से काम लेते हुए जीवन मे कुछ सबक लेते हुए कदमों को प्रगतिशील पथ पर आगे बढ़ाया ।

सँघर्ष में जीवन और अधिक अनुपम बन जाता है जब अपनी अभिरुचि में उत्कृष्टता दुनिया को दिखानी हो । अभिरुचि के विषय मे सारिका का कहना है कि बचपन से क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था । क्रिकेट शायद शौक के लिए खेलती थी , कभी न सोचा था मेरी रुचि संघर्ष से उचाइयां छू लेगा। क्रिकेट खेलने के इस शौक ने मुझे बाएँ हाथ से बॉलिंग चाइनामैन स्पेसलिस्ट सम्पूर्ण राजस्थान की एकमात्र खिलाड़ी होने का सौभाग्य दिलाया व साथ ही दांये हाथ से बैटिंग में विशेष काबिलियत दिलाई । अपनी कॉलेज शिक्षा के साथ ही खेलजगत में नेशनल क्रिकेट टीम में बतौर कप्तान व डिस्ट्रिक ,स्टेट जॉन सहित सेंट्रल जॉन में भी क्रिकेट में महारत हासिल की ।सारिका राजस्थान की एक मात्र महिला थी जिनका राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट टीम में चयन हुआ था ।

समाजसेवा का सफर –
जीवन की सार्थकता स्वयं से हटकर दूसरों के लिए सोचना भी है। ‘परहित सरस धरम नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई’ तुलसीदासजी की इन्हीं पंक्तियों के अनुरूप ही सार्थक है सारिका जी का जीवन । मानवसेवा की लगन से ही सारिका जी का यह सफर बचपन से शुरू होकर भारत विकास परिषद जैसी बड़ी संस्था तक जा पहुंचा है । सारिका जी का कहना है कि बचपन में 10 -11 वर्ष की उम्र में ही यात्रा के दौरान जब सड़क पर सर्दी से कांप रहे गरीब व्यक्तियों को देखा तो मन मे मानवसेवा की लगन जाग उठी , वहीं के वहीं बैग में से कम्बल व स्वेटर निकाल उन गरीबों को दान किये । इस रुझान को जारी रखते हुए जब जब भी मौका मिला लोगो से कपड़े , स्वेटर इक्ट्ठा करती व भरी सर्दी से कांप रहे लोगो को दान करती । ऐसे छोटे – मोटे रूपों में समाजसेवा को जारी रखा , जब कॉलेज शिक्षा प्रारम्भ हुई उसी दौरान गरीब व असहाय बच्चों के उद्द्गार हेतू ” AIM Coaching institute ” की शुरुआत की । मेधावी गरीब बच्चों की फीस का खर्चा भी स्वयं ही वहन करती थी । बच्चों को शिक्षित करने के लिए 4-5 शिक्षकों की भी व्यवस्था कर रखी थीं जो करीब 160 से अधिक गरीब बच्चों को पढ़ाते थे । इन सभी बच्चों के लिए कोचिंग व किताबों की सम्पूर्ण व्यवस्था स्वयं करती थी । शिक्षा पूरी होने के बाद विवाह बचपन के साथी कोटा में ही लोकेश जी मित्तल से हुआ जिन्होंने शादी उपरांत भी सामाजिक कार्यों में मेरी हर सम्भव मदद की । इन्हीं की मदद से करीब चार वर्ष पूर्व भारत विकास परिषद प्रताप शाखा से जुड़ी । जिसमें कुछ समय शाखा महिला प्रमुख भी रही इत पश्चात नई शाखा रानीलक्ष्मी का गठन हुआ जिसमें शुरुआत से लेकर अब तक अध्यक्ष के पद रहते हुए कई सामाजिक कार्यो से सम्पूर्ण संगठन में पहचान बनाई । महिला सशक्तिकरण के साथ ही गरीब बच्चों को पढ़ाना ,रक्तदान शिविर , वृक्षारोपण , निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर , बड़े बड़े कवियों के काव्यपाठ का आयोजन , सरकारी विद्यालयों में मानवाधिकार कार्यक्रम , छात्राओं हेतू आत्मरक्षा व अनुचित विरोध कार्यक्रम , समूह ज्ञान प्रतियोगिता , विद्यार्थियों को मोटीवेट करने हेतू ” खुशियों की चाबी “,”बाल विवाह मुक्त भारत ” “मासिक धर्म ” अभिशाप नहीं ,”गुड टच बेड टच” भारत जानो प्रतयोगिता ” सकार्यक्रम सहित कई सामाजिक कार्य मेरी अध्यक्षता में शाखा द्वारा करवाएं जा चुके है ।

सामाजिक क्षेत्र में विशिष्ट कार्य हेतु कोटा शहर सहित राजस्थान के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित व FM , TV पर भी प्रसारण

● पुरुस्कार एवं सम्मान
◆ राजस्थान में ‘ ऑल राउंडर ‘ क्रिकेटर हेतू उत्कृष्ट सम्मान
◆ भारत विकास परिषद द्वारा ” प्रांतीय उत्कृष्टता सम्मान ”
◆ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मदन दिलावर से सम्मानित
◆ राष्ट्रीय कवि जगदीश जी ‘ जलजला ‘ के हाथों ” लक्ष्मीबाई उपाधि ” से सम्मानित
◆ जयपुर की महारानी जी से ‘ बेस्ट बॉलर ‘ हेतू सम्मानित
◆ माखनलाल चतुर्वेदी , रामकिशन वर्मा , पूनम गोयल सहित कई नामी हस्तियों से सम्मानित
◆ राजस्थान की प्रथम महिला ‘ ऑल राउंडर क्रिकेटर ‘ के खिताब से उमा भारती जी द्वारा सम्मानित
◆ सामाजिक क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्यो हेतू कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित