छबड़ा में एक पखवाड़े के लम्बे अंतराल के हुई बाद वर्षा से भूमि पुत्रो के चेहरो खिल उठे तो वहीं आमजन ने भी राहत की सांस ली। सावन के पहली बारिश ने मौसम में ठंडक घोल दी। बरसात का दौर रूक-रूककर जारी रहा। अच्छी बारिश की कामना को लेकर मंदिरो व धार्मिक स्थलो पर भजन-किर्तनो का दौर चल रहा था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रावण माह बारिश का प्रमुख माना जाता हैं, लेकिन एक पखवाड़े से वर्षा नही होने से फसल सूखने की कगार पर थी जिससें किसानो के चेहरो पर चिंता की लकीरे दिखने लग गई थी एवं फसल खराब होने का ड़र सताने लग चुका था। एवं बारिश नही होने के कारण लोग मायूस होते नजर आ रहे थे। लेकिन बुधवार को सावन की पहली वर्षा से किसानो के चेहरे खिल उठे एवं पहले धीमी व कुछ देर बाद तेज गति से वर्षा होने से मौसम सुहावना हो गया जिससे लोगों ने गर्मी व उमस से राहत महसूस की। लम्बे समय से वर्षा का इंतजार कर रहे किसानो को काफी हद तक राहत मिली हैं। लेकिन अभी-भी अधिकांश गांवो में बारिश नही होने के कारण ग्रामीण इंद्र देव को प्रसन्न करने एवं अच्छी बारिश की कामना को लेकर घास भैरू की सवारी निकाली तो कही मंदिरो एवं धार्मिक स्थलो पर महिलाएं भजन-किर्तन कर रही हैं। रिमझिम बारिश होने से सड़के तरबतर हो गई। मौसम मे आए अचानक परिवर्तन के कारण सावन की बूंदे बरस पड़ी जिससे मौसम को खुशनुमा बना दिया। हालांकि छितराई बारिश होने से कई इलाके सूखे ही रह गए।

मुरझाती हुई फसलो के लिए बरसा अमृतः- सावन के पंद्रह दिन गुजर जाने के बाद बुधवार को हुई वर्षा से मुरझाती हुई फसलों मे जीवनदान मिला हैं। बारिश के इंतजार में फसले पीली पड़ने लग गई थी। किसानो ने बताया कि यह बारिश सभी फसलो के लिए अच्छी साबित होती हैं। लेकिन खरीफ की फसल के लिए अमृत के समान बताई गई हैं। केवल कृषि पर निर्भर रहने वाले किसानो के मुरझाए चेहरो पर रौनक लौट आई है तथा अचानक हुई वर्षा से किसानो को फसल की अच्छी पैदावार होने की आस बंध गई हैं।