रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) इस साल का सबसे लंबा और आखिरी चंद्रग्रहण 27 जुलाई को लगेगा। ग्रहण मकर राशि और उतराषाढ़ नक्षत्र पर शुरू होकर श्रवण नक्षत्र पर समाप्त होगा। यह इस वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण है। ज्योतिषविद के मुताबिक चंद्र ग्रहण की शुरुआत 27 जुलाई को रात 11.54 पर मेष लग्न में शुरू होगी और मध्य रात 3.50 पर मिथुन लग्न में समाप्त होगा। आम तौर पर ग्रहण एक या डेढ़ घंटे की अवधि वाले होते हैं, लेकिन यह ग्रहण 4 घंटे तक रहेगा। माना जा रहा है कि इतना लंबा चंद्रग्रहण इसके बाद सदी के आखिर तक दिखाई नहीं देगा। इससे पहले 16 जुलाई 2000 में ऐसा ग्रहण लगा था। यह संयोग ही है कि ग्रहण वाले दिन ही यानी 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा भी है, इसलिए इसका महत्व बढ़ जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद 28 जुलाई को भोलेनाथ का प्रिय श्रावण मास शुरू हो जाएगा। इस माह श्रद्धालु महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना करेंगे।
चंद्रग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2.54 पर शुरू होगा। इसके साथ ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। दुनिया के वैज्ञानिक इसे एक खगोलीय घटना मानते हैं, लेकिन भारतीय ज्योतिष में चंद्र ग्रहण का अति महत्व बताया गया है। चन्द्रग्रहण के समय मकर राशि में उच्च मंगल के साथ बैठे चन्द्रमा को केतु ग्रसित करेगा, जिस पर कर्क राशि में बैठे सूर्य, राहू और बुध की पूर्ण दृष्टि होगी।
ज्योतिष भिक्कूलाल शर्मा ने बताया कि चंद्रग्रहण के समय वातावरण दूषित होने के कारण इस दौरान भोजन आदि नहीं करना चाहिए। गर्भवती स्त्रियों को तो सूतक काल में भी घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। जल और खाने वाली चीजों में तुलसी के पत्ते या कुशा डाल देनी चाहिए। इसके साथ चंद्रमा का मंत्र …ओम सो सोमायः नमः का जाप करना चाहिए। ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप सर्वश्रेष्ठ है। ग्रहण से एक दिन पहले सिंदूर में थोड़ा घी मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बना देना चाहिए। इससे चन्द्र ग्रहण की निगेटिव एनर्जी घर से दूर रहती है।