सांसद ओम बिरला ने संसद में मानव तस्करी विदेयक पर रखे अपने विचार

आपणी ख़बरा | कोटा
कोटा– सांसद ओम बिरला ने आज संसद में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए एक बड़े सुधार के रूप में पेश किए गए व्यक्तियों का दुर्व्यापार ( निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018 पर चर्चा में भाग लेकर अपने विचार रखे। अपने व्यक्तव्य में उन्होंने कहा कि मानव तस्करी आज नशीली दवाओं और हथियारों की तस्करी के बाद विश्वभर में तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है, जिसका सबसे बड़ा शिकार महिलाएं और बच्चे होते हैं। यूनाइटेड नेशन्स आफिस ऑन ड्रग्स एन्ड क्राइम के अनुसार पूरी दुनिया में हो रही मानव तस्करी में 71 प्रतिशत महिलाएं लड़कियां एवं लगभग एक तिहाई बच्चे पीड़ित होते हैं जिनमे से आधे भारत से होते हैं। वर्तमान में इसे रोकने के तंत्र में सबसे बड़ी समस्या अलग अलग राज्यों के आपसी सामंजस्य में होती है, जिसके कारण एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाकर तस्करी के संगठित गिरोह सक्रिय हैं। इस कमी को दूर करने के लिए इस बिल के माध्यम से पर्याप्त कानूनी सुधार किए गए हैं जिसमें राष्ट्रीय एंटी ट्रैफिकिंग ब्यूरो की स्थापना, राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी की नियुक्ति, एक पुलिस नोडल अधिकारी की नियुक्ति, जिला स्तर पर एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट्स, राहत एवं पुनर्वास सेवा और सजा के रूप में 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1 वर्ष के भीतर अनिवार्य रूप से न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण करना सम्मिलित हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि देशभर में मानव तस्करी रोकने के लिए यह विधेयक कामयाब होगा, इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका गांधी का हार्दिक साधुवाद ज्ञापित करता हूँ।