रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) प्रदेश में रोडवेज कर्मियों के संयुक्त मोर्चे के हड़ताल के आह्वान पर मंगलवार रात 12 बजे से रोडवेज के चक्के दो दिन के लिए थम गए। जो बुधवार को भी थमे रहे | दो दिवसीय हड़ताल के दौरान रोडवेज के सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहें। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि लंबी दूरी के लिए ट्रेनें व निजी बसें विकल्प के रूप में मौजूद रही। वहीं लोक परिवहन सेवा का संचालन भी सुचारू रूप से रहा। तथां निजी बसों व जीपों द्वारा मनचाहे राशि वसूली गई, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। रोड़वेज बसों का संचालन नहीं होने के कारण रावतभाटा से रोड़वेज की उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, मंदसौर-नीमच, झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, जयपुर, खेतड़ी, डीडवाना, टोंक, अजमेर, जोधपुर, ब्यावर सहित अन्य स्थानों पर जाने वाली बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों को दर-दर भटकना पड़ा।
रोडवेज सेवानिवृत कर्मचारियों के 2015 से सेवानिवृति के सभी परिलाभों का भुगतान, बोनस, नई बसों की खरीद, अवैध संचालन को रोकने, कर्मचारियों को समय पर वेतन व जरूरत के अनुसार अवकाश की व्यवस्था की मांग को लेकर रोडवेजकर्मियों का धरना बुधवार को जारी रहा। रोड़वेजकर्मियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठ रही है। बावजूद इसके रोडवेज प्रबंधन व प्रदेश सरकार की ओर से कर्मचारियों की सुनवाई नहीं की जा रही।
रोडवेज कर्मियों का कहना है कि राज्य सरकार रोडवेजकर्मियों से सौतेला व्यवहार कर रही है। सुविधाएं बढ़ाने के बजाए कम की जा रही है। नई बसों की खरीद नहीं होने से रोडवेज प्राइवेट व लोक परिवहन की सुविधाओं से मुकाबला नहीं कर पा रही है। रोडवेज का जानबूझकर घाटा बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उक्त मांगों के संदर्भ में रोडवेजकर्मियों ने दस जुलाई को सरकार को लिखित में हड़ताल पर जाने का नोटिस दिया था। तत्पश्चात दो बार हुई वार्ता बेनतीजा निकली। कर्मचारियों की समस्याओं को कोई हल नहीं निकला। ऐसे में अब कर्मचारियों ने रात 12 बजे से किया गया। जानकारी के मुताबिक कोटा व चित्तौड़गढ़ डिपो की बसों का रात 12 बजे के बाद संचालन बंद कर दिया गया। रात में ऑफ होने वाली लंबी दूरी की बसों को वर्कशॉप में खड़ा करवा दिया गया। तथा रवाना हुई बसों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करवाया। रोड़वेज कर्मियों का कहना है कि मांगें मनवाने के लिए सरकार पर पूरा दबाव बनाया जाएगा।