रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) मानसून आने के साथ ही हरी सब्जियों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मानसून की बारिश के बाद खेतों में पानी भर गया तो सब्जियों की पैदावार भी घट गई। लौकी, टमाटर, भिंडी जैसी सब्जियां भी खरीदारों को आंखें दिखा रही हैं। पिछले एक सप्ताह में सब्जियों के दामों में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई है।
थोक विक्रेताओं का कहना है कि मानसून की वजह से सप्लाई कम होने से पिछले एक सप्ताह के दौरान सब्जियों के दाम बढ़े हैं। इसके चलते मध्यम वर्ग के लिए टिंडे व भिंडी जैसी सब्जियां खरीदना भारी पड़ रहा है। मानसून की वजह से पिछले एक सप्ताह के दौरान आसपास के क्षेत्रों से सब्जियों की आवक में काफी कमी आई है। इसके चलते सब्जियों की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है, जबकि 15 दिन पहले सब्जियों के भाव काफी कम थे।
जुलाई से पूरे क्षेत्र में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। यह लोगों के लिए संतोष की बात है, लेकिन पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश से सब्जियों की खेती पर विपरीत असर पड़ा है। इस समय सब्जियों की पैदावार बहुत ही कम हो रही है, ऐसे में इसके दामों में दुगुनी बढ़ोतरी हो गई है, इसका असर सीधा घर की रसोई पर पड़ने लगा है। वहीं घरों में भी सब्जियों के तड़के में कमी आई है, जिन घरों में दो से तीन सब्जियां एक वक्त में बन रही थीं, वहां अब एक ही सब्जी से काम चलाया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश से सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। 1 जून को टमाटर 10 से 15 रुपए किलो बिक रहा था, लेकिन अब इसका भाव 20 जुलाई को करीब 60 रुपए किलो हो गया है, जबकि हरी मिर्च 80 रुपए तो शिमला मिर्च 20 रुपए से एकदम सौ रुपए किलो के पार पहुंच चुकी है। इसके अलावा पत्ता गोभी, बैंगन, ग्वारफली, कद्दू, प्याज, आलू, भिंडी, कटहल व फूलगोभी के भाव में काफी तेजी आई है। सब्जियों के बढ़ते दाम में हर घर की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। नगर में रविवार को लगे साप्ताहिक हाट में सब्जी की आवक कम हो रही है। पिछले 15 जून के मुकाबले सब्जी की आवक भी आधी रह गई है।
सब्जियों के बढ़ते दामों में आम उपभोक्ताओं के घर का बजट बिगाड़ दिया है। शहरवासियों को अब एक माह तक सीमित बजट में ही काम चलाना पडेगा। भाव बढ़ने से सीमित सब्जी से काम चलाना पड़ रहा है। सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि बारिश कम होने के बाद सब्जियों के भाव में गिरावट आएगी।