रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) राज्य सरकार द्वारा मिड डे मील योजना के तहत अन्नपूर्णा दूध योजना का शुभारंभ समारोह के साथ जिला मुख्यालय एवं पंचायत समिति मुख्यालयों पर किया जाएगा। जिला मुख्यालय एवं पंचायत समिति मुख्यालयों पर अन्नपूर्णा दूध योजना की तैयारियां पूरी कर ली गई है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक ने बताया कि मुख्यमंत्री के वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट अभिभाषण में मिड डे मील योजना के तहत समस्त राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों, मदरसों में अध्ययनरत कक्षा प्रथम से आठवीं तक के छात्र छात्राओं को 2 जुलाई से शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में सोमवार, बुधवार व शुक्रवार एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में सोमवार, बुधवार, शुक्रवार अथवा मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को पोषाहार के रूप में ताजा दूध पिलाया जाएगा। बच्चों को यह दूध प्रार्थना सभा के बाद वितरित किया जाएगा। योजना के शुभारंभ के दिन सोमवार को प्रत्येक विद्यालय में विशेष पेरेंट्स टीचर मीटिंग का आयोजन किया जाएगा एवं 9 जुलाई तक प्रत्येक विद्यालय में दूध योजना सप्ताह मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कक्षा प्रथम से पांचवीं तक के छात्रों को 150 एमएल एवं कक्षा छठी से आठवीं तक छात्रों को 200 एमएल दूध दिया जाएगा। एसएमसी द्वारा क्रय किए गए दूध का भुगतान संबंधित आपूर्तिकर्ता को चैक अथवा बैंक खाते में राशि हस्तांतरित कर किया जाएगा। वही दूध गर्म करने के लिए आवश्यक बर्तनों के लिए संबंधित विद्यालयों को 2 हजार 500 रुपयों की राशि का आंवटन किया गया है। लेक्टोमीटर विद्यालय स्तर से ही क्रय किए जाएंगे। क्रय किए गए दूध की जांच विद्यालय स्तर पर लेक्टोमीटर से की जाएगी और दूध में यूरिया, स्टार्च या अन्य कोई रसायन नहीं मिला हो तो इसके लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या खाद्य सुरक्षा निरीक्षक द्वारा समय समय पर जांच की जाएगी। विद्यार्थियों को दूध पिलाए जाने से पूर्व प्रतिदिन अध्यापक एवं विद्यार्थी के अभिभावक या एसएमसी के सदस्य द्वारा पोषाहार की भांति दूध को चखा जाएगा तथा इसका रजिस्ट्रर भी संधारित किए जाने के अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय में पोषाहार मेन्यू को विद्यालय के मुख्य स्थान पर पेंट से अंकित करवाया जाएगा।
मिड-डे-मील योजना अन्तर्गत “अन्नपूर्णा दूध योजना” को प्रारंभ करने का प्रमुख उद्देश्य राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रछात्राओं के नामांकन, उपस्थिति में वृद्धि, ड्रॉप आउट को रोकना एवं पोषण स्तर में वृद्धि तथा आवश्यक मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स उपलब्ध करवाया जाना है।