चित्तौड़गढ़ नगरपरिषद् के आॅडिटोरियम में रावतभाटा सहित जिले की अन्य नगरपालिकाओं के सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया की लाॅटरी निकालते जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह एवं अन्य अधिकारी |

रावतभाटा – शिव सिंह चौहान (पत्रकार) चित्तौड़गढ़ जिले की पांच नगरपालिकाओं रावतभाटा, बेंगू, निम्बाहेड़ा, बड़ीसादड़ी एवं कपासन नगरपालिकाओं के सफाई कर्मचारियों की बुधवार को नगरपरिषद् के आॅडिटोरियम में जिला कलेक्टर इन्द्रजीत सिंह, अतिरिक्त कलेक्टर (प्रशासन) नारायण सिंह चारण एवं समिति के सदस्यों की उपस्थिति में कम्प्यूटर पर आॅनलाईन वेब बेस एप्लीकेशन के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया की लाॅटरी निकाली गई। इस मौके पर नगर विकास न्यास सचिव सी.डी. चारण, नगरपरिषद् आयुक्त मो. नसीम शेख, रावतभाटा नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी सौरभ जिंदल सहित संबंधित नगरपालिकाओं के अधिशाषी अधिकारी मौजूद थे।
चित्तौड़गढ़ जिले की रावतभाटा, बेंगू, निम्बाहेड़ा, बड़ीसादड़ी एवं कपासन नगरपालिकाओं में सफाईकर्मियों की बुधवार को हुई लॉटरी प्रक्रिया पर हाईकोर्ट के आदेश की तलवार लटक गई है। जंहा मंगलवार देर शाम भर्ती को लेकर जारी किए गए आदेश में लॉटरी में चयनितों के नाम सार्वजनिक नहीं करने के आदेश के तहत बुधवार को लॉटरी की प्रक्रिया अपनाई तो गई, लेकिन किसी भी चयनित का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया। लॉटरी में चयनित अभ्यर्थियों के नाम लिफाफों में बंद कर सुरक्षा में रखवा दिए गए है। इनको सार्वजनिक हाईकोर्ट के आगामी आदेशों के अनुसार ही किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के स्थानीय निकायों में 21 हजार 136 पदों पर हो रही सफाईकर्मियों की 2018 की भर्ती में लॉटरी के जरिए चयन करने को चुनौती देने के मामले में भर्ती के परिणाम व नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में स्वायत्त शासन विभाग के सचिव व निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अवकाशकालीन न्यायाधीश बीएल शर्मा व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश मंगलवार को अखिल भारतीय वाल्मिकी समाज की याचिका पर दिया। याचिका में कहा कि राज्य सरकार ने 2012 की सफाईकर्मियों की भर्ती के पूरे पदों पर नियुक्ति नहीं दी थी और पद खाली रह गए थे। इन खाली पदों को राज्य सरकार ने 2018 की भर्ती में शामिल कर लिया। इस दौरान राज्य सरकार ने 23 जनवरी 2014 को नियमों में संशोधन कर दिया और भर्ती की प्रक्रिया को लॉटरी के जरिए तय किया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि लॉटरी की प्रक्रिया को 2012 के पदों पर लागू नहीं किया जा सकता। इसके अलावा लॉटरी में अनुभव व योग्यता का आंकलन नहीं हो पाता। इसलिए लॉटरी के जरिए सफाईकर्मियों की चयन प्रक्रिया करना गलत है। अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए सफाईकर्मियों की भर्ती के परिणाम जारी करने व नियुक्तियों पर रोक लगा दी |