कोटा- राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने एक आदेश निकाला जिसमे स्पष्टरूप से कहा कि निगम कर्मचारियों को पिछले साल दिए गए ओवरटाइम बजट का इस वित्तीय वर्ष में 80% ही ओवरटाइम का भुगतान किया जाय। यानि तकनीकी कर्मचारियों को कोटा थर्मल में अब तक एक क्वार्टर (तीन महीने) में अधिकतम 50 घंटे का ओवरटाइम दिया जाता था, जिसे अकारण ही घटाकर उत्पादन निगम के सीएमडी ने 40 घंटे प्रती क्वार्टर कर दिया है।

विदित हो कि कोटा थर्मल के तकनीकी कर्मचारी हर महीने निरंतर सेवानिवृत्त हो रहे हैं तथा राजस्थान सरकार द्वारा तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जा रही है। प्लांट में लोकेशंस खाली पड़ी है, इसके बावजूद तकनीकी कर्मचारियों को ओवरटाइम करने से रोका जा रहा है। वही तकनीकी कर्मचारी प्लांट में ओवरटाइम करने को तैयार हैं लेकिन थर्मल प्रशासन द्वारा नियमित कर्मचारियों को ओवरटाइम पर नहीं रोक रॉक कर अकुशल श्रमिकों से कार्य लिया जा रहा है जिससे प्लांट में आए दिन हादसे होते रहते हैं विद्युत उत्पादन बाधित होता है।
राजस्थान राज्य तकनीकी कर्मचारी सेवा नियमों में आज तक अधिकतम 50 घंटे का ओवरटाइम तकनीकी कर्मचारियों को दिया जाता है। इसमें राज्य सरकार ने कोई संशोधन नही किया है। फिर भी नियमों को ताक में रखकर उत्पादन निगम के सीएमडी ने आदेश जारी कर तकनीकी कर्मचारियों का प्रति क्वार्टर अधिकतम 40 घंटे का ओवरटाइम कर दिया है।
इस पर भारतीय मजदूर संघ कि कोटा थर्मल इकाई के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा के निर्देशानुसार महामंत्री वीरेंद्र कश्यप ने कहां की यदि कर्मचारियों को प्रति क्वार्टर 50 घंटे ओवरटाइम नहीं दिया गया तो संगठन उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा। इस क्रम में अगर सात दिवस के अंदर कर्मचारियों के 50 घंटे ओवरटाइम की शीट के ऊपर यदि थर्मल अधिकारियों ने साइन नहीं किए तो संगठन मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव करेगा तथा आगामी 16 जून को कोटा थर्मल के मुख्य द्वार पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना देगा तथा सीएमडी के नाम मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपेगा।